राह कितनी पुरख़तर मत पूछिए
है कटा कैसे सफ़र मत पूछिए .
एक छोटी सी ख़ता ने किस क़दर
कर दिया है दर-ब-दर मत पूछिए.
चाँद तारे सुन रहे थे सिसकियाँ
शह्र था क्यों बेख़बर मत पूछिए.
एक-सा चेहरा पहन कर सब खड़े
कौन किसका पक्षधर मत पूछिए.
कौन पहुँचा है यहाँ तक किस तरह
जानता हूँ सब मगर मत पूछिए .
वन बबूलों के उगे हैं हर तरफ
नीम शीशम हैं किधर मत पूछिए .
उम्र गुज़री है इसी फुटपाथ पर
मित्र मेरा गाँव-घर मत पूछिए.
@जय चक्रवर्ती
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