Tuesday, 25 February 2020

अजब ये दौर है
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कभी दिल्ली, कभी पटना, कभी बंगलौर जलता है,
कहीं कुछ और जलता है, कहीं कुछ और जलता है;
जला है कुछ न कुछ अक्सर यहां हर दौर में लेकिन-
अजब ये दौर है जिसमें समूचा दौर जलता है.

Monday, 24 February 2020

उठो साथियो !
जागो जनगण देश के,उठो मचाओ शोर।
लिए तुम्हारी रोटियां, भाग रहे हैं चोर।।

पल प्रतिपल फुंफकारता, अँधियारा खूँरेज।
उठो साथियो हाथ की, करो मशालें तेज।।

अंधों की इजलास में, गूँगों पर अभियोग।
और


Sunday, 23 February 2020

कहा था जो कबीरा ने

कहा था जो कबीरा ने कहाँ दैरो-हरम समझे
न पंडित मौलवी समझे न चाकू और बम समझे
पढ़े बिन प्रेम के आखर न ज्ञानी बन सका कोई-
ज़रा सी बात थी लेकिन न तुम समझे न हम समझे।