Tuesday, 25 February 2020

अजब ये दौर है
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कभी दिल्ली, कभी पटना, कभी बंगलौर जलता है,
कहीं कुछ और जलता है, कहीं कुछ और जलता है;
जला है कुछ न कुछ अक्सर यहां हर दौर में लेकिन-
अजब ये दौर है जिसमें समूचा दौर जलता है.

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