Saturday, 14 March 2020

हे कोरोना !
       तुमने दुनिया भर को दहशत में भले ही डाल रखा हो , पर हमारे देश में कुछ नहीं कर पाओगे। तुमसे ज्यादा खतरनाक और बड़े बड़े वायरस यहां पहले से ही मौजूद हैं, जो लोगों की रोजी-रोटी, घर मकान , उद्योग -धंधे , कल- कारखाने, संविधान- कानून , अर्थव्यवस्था सब कुछ पहले से ही निगल रहे हैं। वे इतने शातिर और चालाक हैं कि सारे देश को  खाए जा रहे हैं और लोगों को पता भी नहीं चल रहा। उल्टे तमाम लोग कानों में रुई और आँखों में पट्टी बांध कर दिन रात उनके जयकारे लगा रहे हैं।
हे कोरोना!
      तुम जाओ यहां से। तुम्हारी औकात हमको मालूम है। तुम सिर्फ़ डर फैलाओगे , बहुत हुआ तो कुछ लोगों को बीमार कर दोगे या फिर कुछ लोगों को मौत दे दोगे। बस, इससे ज्यादा हैसियत नहीं है तुम्हारी । पर हम तो यहां  ऐसे ऐसे वायरसों के साथ जी रहे हैं, जो कोर्ट- कानून, चुनाव आयोग, सीबीआई , बैंक, विश्व विद्यालय और अन्य तमाम संवैधानिक और शैक्षणिक संस्थाओं को  रोजाना निगल रहे हैं । वे जिस सांसद , विधायक या  सरकार को चाहते हैं उसे एक सांस में  निगल लेते हैं और डकार तक नहीं लेते । वे चाहें तो पूरे देश के एक सौ पैंतीस करोड़ लोगों को पलक झपकते निगल सकते हैं।
अब सोचो कोरोना ! तुम्हारी कूबत है इतनी ? नहीं न ??
       इसीलिए कहता हूं कि तुम जितनी जल्दी हो सके यहां से निकल लो । तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
     वैसे भी हम भारतीय लोग सड़कों के किनारे और मेलों ठेलों में धूल, मिट्टी , धुंआ , बदबू के बीच जलेबियां, समोसे , चाट , पानी -पूरी और कई दिनों के बासी फल और सब्जियां खा पीकर मस्त रहने वाले लोग हैं ।
 कोरोना ! तुम ठहरे चीन के उत्पाद , जिनकी कोई गारंटी ही नहीं होती कि कितने दिन टिकेंगे।
इसलिए हे कोरोना ! तुम जाओ यहां से। हमें खत्म करने के लिए हमारे अपने कोरोना ही पर्याप्त हैं। हमें मरना होगा तो हम अपने देश के कोरोनाओं के हाथों मरेंगे । तुम चाइनीज़  हो , विदेशी हो । जाओ! हम तुम्हारा वहिष्कार करते हैं।
भारत माता की जय !!

@ जय चक्रवर्ती
   14.3.2020

Tuesday, 25 February 2020

अजब ये दौर है
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कभी दिल्ली, कभी पटना, कभी बंगलौर जलता है,
कहीं कुछ और जलता है, कहीं कुछ और जलता है;
जला है कुछ न कुछ अक्सर यहां हर दौर में लेकिन-
अजब ये दौर है जिसमें समूचा दौर जलता है.

Monday, 24 February 2020

उठो साथियो !
जागो जनगण देश के,उठो मचाओ शोर।
लिए तुम्हारी रोटियां, भाग रहे हैं चोर।।

पल प्रतिपल फुंफकारता, अँधियारा खूँरेज।
उठो साथियो हाथ की, करो मशालें तेज।।

अंधों की इजलास में, गूँगों पर अभियोग।
और


Sunday, 23 February 2020

कहा था जो कबीरा ने

कहा था जो कबीरा ने कहाँ दैरो-हरम समझे
न पंडित मौलवी समझे न चाकू और बम समझे
पढ़े बिन प्रेम के आखर न ज्ञानी बन सका कोई-
ज़रा सी बात थी लेकिन न तुम समझे न हम समझे।

Tuesday, 18 July 2017

राह कितनी पुरख़तर मत पूछिए

राह कितनी पुरख़तर मत पूछिए
है कटा कैसे सफ़र मत पूछिए .

एक छोटी सी ख़ता ने किस क़दर
कर दिया है दर-ब-दर मत पूछिए.

चाँद तारे सुन रहे थे सिसकियाँ
शह्र था क्यों बेख़बर मत पूछिए.

एक-सा चेहरा पहन कर सब खड़े
कौन किसका पक्षधर मत पूछिए.

कौन पहुँचा है यहाँ तक किस तरह
जानता हूँ सब मगर मत पूछिए .

वन बबूलों के उगे हैं हर तरफ
नीम शीशम हैं किधर मत पूछिए .

उम्र गुज़री है इसी फुटपाथ पर
मित्र मेरा गाँव-घर मत पूछिए.

@जय चक्रवर्ती

तुम्हें बस राग अपना छेड़ना है

तुम्हें बस  राग अपना छेड़ना है
न सुनना और की, खुद बोलना है.

जवाबों पर ठिठुरती बर्फ़ रखकर
सवालों को सुलगता छोड़ना है.

तुम्हारे सामने मुँह खोलना भी
समूचे मुल्क की आलोचना है .

कभी लफ़्फ़ाज़ियाँ देखीं न ऐसी
न जाने और क्या क्या देखना है.

सदा ख़ुद को बताना चाँद सूरज
उठा कर मुँह फ़लक पर थूकना है.

कभी उतरो हवा की पीठ से ,तो
हक़ीक़त भी समझना, प्रार्थना है.

सुनी है बद् दुआ सबने हमारी
हमारी आह को किसने सुना है!

@जय चक्रवर्ती

आप कितना बोलते हैं

आप कितना बोलते हैं
आप क्या-क्या बोलते हैं !!

भोर में भी बोलते हैं
शोर में भी बोलते हैं
बोलते हैं चोर से भी-
ज़ोर से भी बोलते हैं

आप कितना बोलते हैं
आप क्या-क्या बोलते हैं !!

आप हाई बोलते हैं
हाई फाई बोलते हैं
बोलते हैं भाई भाई-
फिर कसाई बोलते हैं

आप कितना बोलते हैं
आप क्या-क्या बोलते हैं!!

टोकियो में बोलते हैं
ओहियो में बोलते हैं
बोलते टीवी ट्विटर में-
रेडियो में बोलते हैं

आप कितना बोलते हैं
आप क्या-क्या बोलते हैं!!

आप गिरकर बोलते हैं
आप उठकर बोलते हैं
बोलते हैं आप जमकर-
आप थमकर बोलते हैं

आप कितना बोलते हैं
आप क्या-क्या बोलते हैं!!

आप जब कुछ बोलते हैं
आप सब कुछ बोलते हैं
बोलना हो जब जरूरी-
आप कब कुछ बोलते हैं

आप कितना बोलते हैं
आप क्या-क्या बोलते हैं!!

आप इसको बोलते हैं
आप किसको बोलते हैं
बोलते हैं आप जिसको-
आप उसको बोलते हैं

आप कितना बोलते हैं
आप क्या-क्या बोलते हैं!!

आप पल पल बोलते हैं
आप अविकल बोलते हैं
बोलते हैं आप केवल-
आप केवल बोलते हैं !!

@ जय चक्रवर्ती
17.7.2017